जीवन में ग्रहों का प्रभाव बहुत प्रबल माना जाता है और यदि विशेष रूप से शनि ग्रह अशांत हो जाएं, तो व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार के कष्टों और बाधाओं का आगमन शुरू हो जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ऐसे समय में उचित उपाय करना अत्यंत आवश्यक होता है। world’s famous astrologer के अनुसार, शनि दोष से पीड़ित जातकों को शनिवार के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए तथा व्रत रखना चाहिए। ऐसा करने से शनि की अशुभता कम होती है और जीवन में सुख, शांति एवं उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
- शुद्ध स्नान करके पुरुष पूजाआरम्भ कर सकते हैं।
- महिला शनि चबूतरे पर नहीं जाएं। मंदिर हो तो स्पर्श न करें।
- अगर आपकी राशि में शनि आ रहा है तो शनिदेव को अवश्य पूजें।
- अगर आप साढ़ेसाती से ग्रस्त हो तो शनिदेव का पूजन करें।शनि एक राशि में ढाई वर्ष होता है, इस प्रकार 3 राशियों में शनि के कुल निवास को साढ़ेसाती कहते हैं यानी ये साढ़े सात वर्ष काफी तकलीफ, आफत और मुसीबतों का समय होता है। धार्मिक कथाओ के अनुसार वीर राजा विक्रमादित्य भी शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव में आए थे और तभी उनका राजपाट सब छिन गया था।
- यदि आप शनि दृष्टि से त्रस्त एवं पीड़ित हो तो शनिदेव की अर्चना करें।
- 6. यदि आप कारखाना, लोहे से संबद्ध उद्योग, ट्रेवल, ट्रक, ट्रांसपोर्ट, तेल, पेट्रोलियम, मेडिकल, प्रेस, कोर्ट-कचहरी से संबंधित हो तो आपको शनिदेव मनाना चाहिए।
- यदि आपका पेशा वाणिज्य, कारोबार है और उसमें क्षति, घाटा, परेशानियां आ रही हों तो शनि की पूजा करें।
- अगर आप असाध्य रोग कैंसर, एड्स, कुष्ठरोग, किडनी, लकवा, साइटिका, हृदयरोग, मधुमेह, खाज-खुजली जैसे त्वचा रोग से त्रस्त तथा पीड़ित हो तो आप श्री शनिदेव का पूजन – अभिषेक अवश्य कीजिए।
- सिर से टोपी आदि निकालकर ही दर्शन करें।
शनि एक राशि में ढाई वर्ष होता है, इस प्रकार 3 राशियों में शनि के कुल निवास को साढ़ेसाती कहते हैं यानी ये साढ़े सात वर्ष काफी तकलीफ, आफत और मुसीबतों का समय होता है। धार्मिक कथाओ के अनुसार वीर राजा विक्रमादित्य भी शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव में आए थे और तभी उनका राजपाट सब छिन गया था।
शनि महामंत्र
जिस राशि में साढ़ेसाती लगती है, उस राशि के जातक को शनि महामंत्र के 23,000 मंत्रों को
साढ़े सात वर्षों के भीतर करना अनिवार्य है। शनि महामंत्र के जाप 23 दिनों के अंदर पूरा करना
चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि जातक को शनि महामंत्र जाप एक ही बैठक में नित्य एक ही स्थान पर पूरा करना चाहिए।
महामंत्र
ॐ नीलांजन समाभासम्। रविपुत्रम् यमाग्रजम्।।
छाया मार्तंड सम्भूतम। तम् नमामि शनैश्चरम्।।
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