Mokshada Ekadashi 2026 Date

Mokshada Ekadashi 2026 Date: पूजा विधि और महत्व, जानें व्रत के विशेष उपाय

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली मोक्षदा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। यही वजह है कि कई श्रद्धालु आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए World’s best astrologer से भी सलाह लेते हैं। 

साल 2026 में मोक्षदा एकादशी का व्रत बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाएगी। धार्मिक दृष्टि से यह दिन आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।

अगर आप भी जानना चाहते हैं Mokshada Ekadashi 2026 Date and Time, व्रत की सही पूजा विधि, नियम और धन-संपत्ति बढ़ाने वाले उपाय, तो यह लेख आपके लिए है।

Mokshada Ekadashi 2026 Date and Time

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में मोक्षदा एकादशी दिसंबर महीने में मनाई जाएगी।

  • मोक्षदा एकादशी  –  रविवार, दिसम्बर 20, 2026 को
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय – दिसम्बर 21, 2026 को 12:06 पी एम बजे
  • एकादशी तिथि प्रारम्भ – दिसम्बर 19, 2026 को 04:39 पी एम बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – दिसम्बर 20, 2026 को 02:44 पी एम बजे

धार्मिक मान्यता के अनुसार, उदया तिथि के आधार पर 20 दिसंबर 2026 को मोक्षदा एकादशी व्रत रखा जाएगा।

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गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी 2026

मोक्षदा एकादशी का संबंध केवल भगवान विष्णु से ही नहीं बल्कि श्रीमद्भगवद्गीता से भी जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

इस दिन गीता का पाठ करना, विष्णु सहस्रनाम का जाप और भगवान कृष्ण की आराधना करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

मोक्षदा एकादशी 2026 पूजा विधि

अगर आप पहली बार यह व्रत कर रहे हैं, तो नीचे दी गई मोक्षदा एकादशी 2026 पूजा विधि को अवश्य अपनाएं।

सुबह की तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं।

भगवान विष्णु की पूजा

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें।
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

व्रत कथा और पाठ

  • मोक्षदा एकादशी व्रत कथा पढ़ें।
  • श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

रात्रि जागरण

धार्मिक मान्यता है कि एकादशी की रात भजन-कीर्तन और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

Mokshada Ekadashi Vrat Rules

मोक्षदा एकादशी व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है।

  • व्रत के दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • चावल खाने से बचें।
  • क्रोध, झूठ और अपशब्दों से दूर रहें।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • जरूरतमंदों को दान अवश्य दें।

इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

मोक्षदा एकादशी का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मोक्षदा एकादशी के प्रमुख लाभ

  • पितृ दोष से राहत मिलती है।
  • मानसिक तनाव कम होता है।
  • घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
  • आर्थिक समस्याओं में राहत मिल सकती है।

इसी वजह से इसे साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी में से एक माना जाता है।

Mokshada Ekadashi Upay for Prosperity

यदि आप आर्थिक तंगी, करियर बाधा या घर में नकारात्मक ऊर्जा से परेशान हैं, तो मोक्षदा एकादशी के दिन ये उपाय जरूर करें।

1. तुलसी पूजा करें

भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। इस दिन तुलसी पर घी का दीपक जलाने से धन लाभ के योग बनते हैं।

2. पीली वस्तुओं का दान

चना दाल, हल्दी, पीले वस्त्र और केले का दान करना शुभ माना जाता है।

3. विष्णु मंत्र का जाप

“ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

4. गीता पाठ करें

गीता जयंती के अवसर पर गीता का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

5. गरीबों को भोजन कराएं

जरूरतमंदों को भोजन कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में बरकत बनी रहती है।

पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय

मोक्षदा एकादशी को पितरों की मुक्ति के लिए विशेष दिन माना जाता है। इस दिन:

  • पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें।
  • गाय को हरा चारा खिलाएं।
  • विष्णु मंदिर में दीपदान करें।

ऐसा करने से पितृ दोष शांत होने की मान्यता है।

क्या मोक्षदा एकादशी पर गीता पढ़ना जरूरी है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गीता पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से गीता का पाठ करता है, उसे जीवन में सही मार्गदर्शन और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

निष्कर्ष

Mokshada Ekadashi 2026 केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान विष्णु की कृपा पाने का पावन अवसर है। यदि आप सच्चे मन से व्रत रखते हैं, पूजा विधि का पालन करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु की आराधना करें, गीता का पाठ करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

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