हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है, और उनमें भी श्रावण पुत्रदा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और विशेष रूप से संतान सुख की कामना करने वाले दंपत्तियों के लिए बहुत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से संतान प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 तिथि और समय
श्रावण पुत्रदा एकादशी रविवार, अगस्त 23, 2026-
- 24वाँ अगस्त को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 01:41 PM से 04:16 PM
- पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 10:49 AM
- एकादशी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 23, 2026 को 02:00 AM बजे
- एकादशी तिथि समाप्त – अगस्त 24, 2026 को 04:18 AM बजे
वैष्णव श्रावण पुत्रदा एकादशी सोमवार, अगस्त 24, 2026
- 25वाँ अगस्त को, वैष्णव एकादशी के लिए पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 05:55 AM से 06:20 AM
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 06:20 AM
- एकादशी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 23, 2026 को 02:00 AM बजे
- एकादशी तिथि समाप्त – अगस्त 24, 2026 को 04:18 AM बजे
सटीक समय आपके स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए पंचांग या ज्योतिषीय परामर्श लेना उचित रहता है।
पुत्रदा एकादशी का अर्थ
“पुत्रदा” शब्द का अर्थ है संतान देने वाली। यह एकादशी विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं।
पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक राजा था जिसकी कोई संतान नहीं थी। संतान के अभाव में वह अत्यंत दुखी रहता था। एक दिन वह वन में गया, जहां ऋषियों ने उसे श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया और भगवान विष्णु की कृपा से उसे योग्य संतान की प्राप्ति हुई।
यह कथा दर्शाती है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन में चमत्कारिक बदलाव ला सकता है।
पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
इस व्रत को सही विधि से करने पर अधिक फल प्राप्त होता है:
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- व्रत का संकल्प लें
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
- धूप, दीप, फूल, तुलसी दल अर्पित करें
- विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- दिनभर व्रत रखें (निर्जला या फलाहार)
- रात्रि में जागरण और भजन-कीर्तन करें
- द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत पारण करें
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कैसे करें
- पूर्ण श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखें
- मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें
- नकारात्मक विचारों से दूर रहें
- भगवान विष्णु का ध्यान करते रहें
पुत्रदा एकादशी का महत्व और लाभ
- संतान प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं
- दांपत्य जीवन में सुख और संतुलन आता है
- पापों का नाश होता है
- घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है
- आध्यात्मिक उन्नति होती है
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
कई बार संतान सुख में बाधा का कारण कुंडली दोष भी हो सकता है। ऐसे में अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना लाभदायक होता है। आप Acharya Indu Prakash जैसे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य से Kundli Analysis कराकर सही उपाय जान सकते हैं।
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निष्कर्ष
श्रावण पुत्रदा एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यदि आप सच्चे मन से इस व्रत को करते हैं, तो भगवान विष्णु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

