
गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमय दिन माना जाता है। यह वही दिन है जब प्रभु यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था। नाम भले ही “गुड” यानी अच्छा है, लेकिन यह दिन दर्द, त्याग और बलिदान की सबसे गहरी कहानी अपने भीतर समेटे हुए है।
यीशु मसीह का संदेश और संघर्ष
इतिहास के अनुसार, यीशु मसीह ने अपने जीवन में प्रेम, करुणा और सत्य का संदेश दिया। उन्होंने लोगों को यह सिखाया कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धता से होकर जाता है। यही शिक्षाएँ उस समय के धार्मिक नेताओं को असहज करने लगीं। धीरे-धीरे यीशु के खिलाफ षड्यंत्र रचे गए और अंततः उन्हें रोमन शासन के सामने दोषी ठहरा दिया गया।
क्रूस पर चढ़ाया जाना – मानवता के लिए बलिदान
गुड फ्राइडे की रात, यीशु को बेरहमी से पीटा गया, उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया और फिर उन्हें क्रूस पर चढ़ा दिया गया। यह कोई साधारण मृत्यु नहीं थी, बल्कि मानवता के पापों को अपने ऊपर लेने का एक आध्यात्मिक बलिदान था।
प्रकृति भी बनी साक्षी
इस दिन को “रहस्यमय” इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि क्रूस पर मृत्यु के समय प्रकृति तक बदल गई थी। आकाश में अंधकार छा गया, धरती काँप उठी और मंदिर का पर्दा अपने आप फट गया।
मृत्यु से जीवन की ओर
यीशु की मृत्यु के तीन दिन बाद उनका पुनरुत्थान हुआ, जो यह दर्शाता है कि सत्य और आत्मा को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।
गुड फ्राइडे का वास्तविक अर्थ
गुड फ्राइडे केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और आत्मिक जागरण की कहानी है, जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।

