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क्या आपकी विदेश यात्राओं में अड़चन आ रही है ?

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इस भौतिक जीवन में हर व्यक्ति विदेश (abroad) की यात्रा करना चाहता है और मान-सम्मान को प्राप्त करना चाहता है लेकिन कुंडली के कुछ ग्रह ऐसे होते हैं जो व्यक्ति को विदेश जाने से रोकते रहते हैं | जो व्यक्ति विदेश (abroad) जाना चाहता है और उसकी विदेश यात्रा में हर बार कोई अड़चन आ जाती है तो उसके पीछे कुंडली में ग्रह दोष हो सकते हैं। ज्योतिष में विदेश यात्रा का मतलब समुद्र पार यात्रा करना होता है। इसके अलावा कोई भी लंबी यात्रा जिसमें कम से कम तीन पहर लगें, उस यात्रा को विदेश यात्रा माना जाता है।

आज हम जानेंगे कौन से ग्रह विदेश (abroad) यात्रा में बाधक होते हैं और क्या हैं उनके उपाय –

ज्योतिषाचार्य इन्दु प्रकाश जी कहते हैं कि कुंडली में पंचम, नवम, द्वादश भाव मूल रूप से विदेश यात्रा से संबंधित होते हैं। पाप ग्रहों की विदेश यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राहु व्यक्ति को सबसे ज्यादा विदेश जाने में सहायता करता है। इसके अलावा शनि और मंगल भी सहायता करते हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढैया भी विदेश यात्रा में सहायता करती है। जब कुंडली में चंद्रमा या शुक्र मजबूत होने लगे। कुंडली में शुभ ग्रहों की दशा चल रही हो। जब पासपोर्ट या वीजा में 01, 05 या 09 अंक की प्रधानता हो। किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 04, 13, 22, 31 हो तो व्यक्ति खूब विदेश जाता है या वह कभी विदेश नहीं जा पाता है। अगर कुंडली जल तत्व प्रधान हो तो विदेश जाने में बाधा आती है।

उपाय –

किसी भी संक्रांति के दिन, सफेद तिल और थोड़ा गुड़ लें। सूर्यास्त के समय एक मिट्टी के कुल्हड़ में डालकर उस कुल्हड़ को पीपल के एक स्वयं गिरे हुये पत्ते से ढक लें। फिर किसी आक के पौधे की जड़ में रख आएं। आते समय पीछे मुड़कर न देखें। घर में आकर स्नान जरूर कर लें। नहाने के पानी में थोड़ा सा शुद्ध केसर मिला लें। यह प्रयोग अपने गुरू का आशीर्वाद लेकर करें ताकि जल्दी सफलता मिले।

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