ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर व्यक्ति की जन्मकुंडली में कुछ ऐसे विशेष भाव और ग्रह होते हैं, जो उसके प्रेम जीवन और विवाह की दिशा तय करते हैं। प्रेम ऐसा भाव है जो न उम्र देखता है, न जाति-पाति और न ही सामाजिक बंधनों को मानता है। अनुकूल परिस्थितियाँ मिलते ही दो दिलों के बीच आकर्षण और लगाव उत्पन्न हो जाता है। आज के भौतिक और व्यस्त जीवन में, जहाँ स्त्री-पुरुषों का अधिकांश समय कार्यस्थल पर बीतता है, वहाँ प्रेम का जन्म होना स्वाभाविक है।
लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यही प्रेम समय से पहले टूट जाता है, या फिर लंबे समय तक चलने के बावजूद विवाह तक नहीं पहुँच पाता। कई बार व्यक्ति सब कुछ होने के बावजूद अपने जीवनसाथी से वंचित रह जाता है, जिससे मानसिक तनाव, निराशा और अवसाद जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे में यह जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि व्यक्ति को कब, कैसा और किस प्रकार का प्रेम मिलेगा — और इसका उत्तर जन्मकुंडली (Kundli Analysis) में छिपा होता है।
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आधुनिक जीवनशैली और प्रेम संबंधों की जटिलताएँ
आज के भौतिक और व्यस्त जीवन में, जहाँ स्त्री-पुरुषों का अधिकांश समय कार्यस्थल पर बीतता है, वहाँ प्रेम का जन्म होना स्वाभाविक है। लेकिन परेशानियाँ तब शुरू होती हैं जब यह प्रेम समय से पहले टूट जाता है या विवाह तक नहीं पहुँच पाता। कई बार व्यक्ति सब कुछ होते हुए भी जीवनसाथी से वंचित रह जाता है, जिससे मानसिक तनाव, निराशा और अवसाद जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
जन्मकुंडली से कैसे पता चलता है प्रेम का भविष्य
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किस व्यक्ति को कब, कैसा और किस प्रकार का प्रेम मिलेगा, यह उसकी जन्मकुंडली देखकर बताया जा सकता है। कुंडली में ग्रहों की दशा और भावों का संबंध यह दर्शाता है कि व्यक्ति के भाग्य में सच्चा प्रेम है या नहीं।
पंचम और सप्तम भाव का प्रेम विवाह से संबंध
ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश जी के अनुसार, यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचम भाव (प्रेम) और सप्तम भाव (विवाह) का आपसी संबंध बनता है, तो ऐसे जातकों के प्रेम विवाह की प्रबल संभावनाएँ होती हैं। ऐसे जातक भावनात्मक, प्रेमी स्वभाव के होते हैं और रिश्तों को निभाने की क्षमता रखते हैं, जिससे उनका दांपत्य जीवन भी सुखी रहता है।
शुक्र ग्रह: प्रेम और दांपत्य सुख का कारक
ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, आकर्षण, पति-पत्नी का संबंध, भोग-विलास और आनंद का कारक माना गया है। जब कुंडली में शुक्र अनुकूल स्थिति में होता है, तो जीवन प्रेम और सुख से भर जाता है। शुक्र और मंगल का शुभ योग जातक के जीवन में तीव्र आकर्षण और गहरे प्रेम संबंधों के योग बनाता है।
पंचम भाव में शुक्र-बुध का प्रभाव
यदि पंचम भाव में शुक्र या बुध ग्रह स्थित हों, तो जातक को प्रेम संबंधों में सफलता मिलती है और वैवाहिक जीवन भी संतुलित रहता है। लेकिन यदि इनके साथ कोई क्रूर या अशुभ ग्रह उपस्थित हो, तो प्रेम में धोखा, गलतफहमी या अस्थिरता की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे जातकों को प्रेम के मामलों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
प्रेम जीवन की समस्याओं का ज्योतिषीय समाधान
यदि आपकी जन्मकुंडली में शुभ योग होने के बावजूद प्रेम जीवन में बाधाएँ आ रही हैं, बार-बार रिश्ते टूट रहे हैं या विवाह में विलंब हो रहा है, तो यह किसी अशुभ ग्रह दशा या दोष का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में विश्वविख्यात ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश जी से कुंडली परामर्श लेकर नकारात्मक योगों का समाधान कराया जा सकता है, जिससे प्रेम और वैवाहिक जीवन में सुख, स्थिरता और सफलता प्राप्त हो सके।
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