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नवरात्रों में मां सरस्वती का पूजन व विसर्जन

शास्त्रों के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा शारदीय नवरात्रों में पंचमी तिथि में होती है और उनका विसर्जन षष्ठी तिथि में किया जाता है। जिन लोगों ने मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की है उन्हें मूर्ति का विसर्जन करके मूर्ति को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। कहा जाता है कि माता सरस्वती (Saraswati Mata) के पूजा का विशेष विधान है। इस दिन माता सरस्वती को प्रसन्न करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, लेकिन हमें यह बात जाननी जरूरी है कि माता का पूजन कैसे किया जाए और किन-किन सामग्री का उपयोग किया जाए।

Saraswati Mata puja

पूजन सामग्री

शारदीय नवरात्रों में मां सरस्वती की पूजन सामग्री नारियल, रोली, मौली, पान, सुपारी, साबुत चावल, दीपक, रुई, घी, प्रसाद हेतु नैवेध, जल पात्र, कलश, माँ सरस्वती तथा भगवान गणेश का चित्र, चन्दन, दूध, दही, शहद, चीनी, सिन्दूर, पुष्प, वस्त्र, कुमकुम, कपूर, लौंग, इलायची आदि की व्यवस्था करें।

पूजन विधि

मां सरस्वती (Saraswati Mata) की पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए। तदोपरान्त कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए।सरस्वती माता की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन और स्नान कराएं। इसके बाद माता को फूल माला चढ़ाएं, सरस्वती माता को सिन्दूर और अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। इस दिन सरस्वती माता के चरणों में गुलाल भी अर्पित किया जाता है।

सरस्वती पूजा में हवन –

सरस्वती माता (Saraswati Mata) की पूजा करने के बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिए। हवन करते समय गणेश जी नवग्रह के नाम से हवन करें। इसके बाद सरस्वती माता के नाम से ”ऊँ श्री सरस्वते नमः स्वाहा“ इस मंत्र से 108 बार हवन करना चाहिए। हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें एवं हवन की भभूत लगाएं।

सरस्वती प्रतिमा का विसर्जन

सरस्वती माता (Saraswati Mata) की पूजा करने के बाद षष्टी तिथि को विजर्सन कर देना चाहिए। संध्याकाल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

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