shiv ji

मंदिर जहाँ हुआ भगवन शिव-पार्वती का विवाह

क्या आपको पता है की भगवान शिव और पार्वति का विवाह कहाँ हुआ था | उत्तराखंड में स्थित  त्रियुगी नारायण मंदिर वो जगह है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती विवाह कर एक पवित्र बंधन में बधें थे | इस मंदिर को बहुत ही पवित्र माना जाता हैं और इस मंदिर का विशेष पौराणिक महत्व …

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चार धामों में से एक “केदारनाथ मंदिर”

मंदिर के पवित्र स्थल की आंतरिक दीवारे पौराणिक कथाओ और बहुत से देवी – देवताओ की चित्रकला से विभूषित है। प्रतिष्ठित मंदिर की उत्पत्ति के प्रमाण हमें महान महाकाव्य महाभारत में दिखाई देते है। यह मंदिर भारत के उत्तराखंड में केदारनाथ की मंदाकिनी नदी के पास वाली घरवाल हिमालय पर्वत श्रुंखालओ पर बना हुआ है। चरम …

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जानें कहां कहां लगता है कुंभ मेला

कुम्भ पर्व विश्व मे किसी भी धार्मिक प्रयोजन हेतु भक्तों का सबसे बड़ा संग्रहण है. लाखों की संख्या में लोग इस पावन पर्व में उपस्थित होते हैं. कुम्भ का संस्कृत अर्थ है कलश, ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिह्न है. हिन्दू धर्म में कुम्भ का पर्व हर 12 वर्ष के अंतराल पर …

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सोमवार के दिन ऐसे करें शिव जी को प्रसन्न

सोमवार के दिन शिव जी की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनके पूजन के लिए अलग-अलग विधान भी है। भक्त जैसे चाहे अपनी कामनाओं के लिए उनकी पूजा कर सकते है। शवे भक्ति:शिवे भक्ति:शिवे भक्तिर्भवे भवे।। अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरंण मम्।। उच्चारण में अत्यंत सरल शिव शब्द अति मधुर है। …

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क्या है कुम्भ मेले का इतिहास ?

कुंभ मेले का इतिहास कम से कम 850 साल पुराना है। माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने इसकी शुरुआत की थी, लेकिन कुछ कथाओं के अनुसार कुंभ की शुरुआत समुद्र मंथन के आदिकाल से ही हो गई थी। मंथन में निकले अमृत का कलश हरिद्वार, इलाहबाद, उज्जैन और नासिक के स्थानों पर ही गिरा …

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अमरनाथ मंदिर गुफा का इतिहास

अमरनाथ गुफा एक हिन्दू तीर्थ स्थान है जो भारत के जम्मू कश्मीर में स्थित है। अमरनाथ गुफा जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिन्दू धर्म में इस तीर्थ स्थान का काफी महत्व है और हिन्दुओ में तीर्थ स्थान को सबसे पवित्र माना जाता है। इस गुफा के …

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क्यों शिव जी के मस्तक पर विराजमान हैं चंद्रमा ? क्यों नहीं चढ़ाये जाते उन्हें सफ़ेद फूल ?

क्यों है भगवान शिवजी के मस्तक पर चंद्रमा? भगवान शिव जी का एक नाम भालचंद्र भी बहुत ही प्रसिद्ध है। भालचंद्र का अर्थ होता है मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाला। चंद्रमा का स्वभाव शीतल होता है। चंद्रमा की किरणें भी शीतलता प्रदान करती हैं। भगवान शिव जी कहते हैं कि जीवन में कितनी भी …

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शनि प्रदोष व्रत – कैसे पाएं शनि देव का आशीर्वाद

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है । प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों के तेरहवें दिन, यानि त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है । जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं । शनिदेव नवग्रहों में से एक हैं । …

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