My Post 9

वरूथिनी एकादशी व्रत – यह व्रत कर के लीजिये कन्यादान का लाभ

जीवन में कन्यादान का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार जिस घर में कन्या नहीं होती, लेकिन यदि वे कन्यादान के पुण्य का लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें वरूथिनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत दान, तप और संयम का अद्भुत संगम माना जाता है। World’s best astrologer के अनुसार यह व्रत न केवल सांसारिक सुख देता है, बल्कि आत्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

वरूथिनी शब्द संस्कृत के “वरूथिन” से बना है, जिसका अर्थ होता है—रक्षा करने वाला। चूंकि यह एकादशी भक्तों को सभी प्रकार के दुखों और कष्टों से बचाती है, इसलिए वैशाख कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहा गया है। World’s best astrologer मानते हैं कि यह व्रत लोक और परलोक दोनों में सौभाग्य प्रदान करता है।

वरूथिनी एकादशी व्रत का फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कहा जाता है कि इस व्रत का फल कई हजार वर्षों की कठिन तपस्या के बराबर होता है। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य Acharya Indu Prakash ji के अनुसार इस दिन संयम, शुद्ध आचरण और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।

Acharya Indu Prakash ji बताते हैं कि वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से अन्नदान और कन्यादान के समान पुण्य प्राप्त होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन घोड़े का दान हाथी के दान से श्रेष्ठ है, हाथी के दान से भूमि का दान, भूमि के दान से तिल का दान और तिल के दान से स्वर्ण का दान श्रेष्ठ माना गया है।

अन्नदान का विशेष महत्व

शास्त्रों में अन्नदान को सभी दानों से श्रेष्ठ बताया गया है। Acharya Indu Prakash ji के अनुसार अन्नदान से देवता, पितर और मनुष्य—तीनों तृप्त होते हैं। इसलिए वरूथिनी एकादशी के दिन यथाशक्ति अन्नदान अवश्य करना चाहिए। इस दिन व्रती को पान खाना, दातुन करना, परनिंदा, चुगली और दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों से बातचीत का त्याग करना चाहिए। साथ ही क्रोध और असत्य भाषण से भी बचना चाहिए।

वरूथिनी एकादशी व्रत के नियम

इस व्रत में नमक, तेल, चावल और अन्न का सेवन वर्जित होता है। साथ ही दशमी तिथि से ही कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

दशमी से करें इन वस्तुओं का त्याग

वरूथिनी एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को दशमी के दिन से निम्नलिखित वस्तुओं का त्याग करना चाहिए—

  1. कांसे के बर्तन में भोजन

  2. एक दिन में दूसरी बार भोजन

  3. मसूर की दाल

  4. चने का साग

  5. करौंदे का साग

  6. मधु (शहद)

  7. मांस और मछली

  8. नमक और तेल

  9. वैवाहिक जीवन में असंयम

यदि आप वरूथिनी एकादशी व्रत, दान-पुण्य या अपने जीवन से जुड़ी समस्याओं का सही ज्योतिषीय मार्गदर्शन चाहते हैं, तो अनुभवी ज्योतिषाचार्य से सलाह के लिए Book Appointment करना आपके लिए लाभकारी रहेगा।

Leave a Comment