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12 मुखी रुद्राक्ष से प्राप्त होती है सूर्य की कृपा

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) भगवान महा विष्णु का स्वरुप माना गया है| बारह आदित्यों का तेज इस रुद्राक्ष में सम्माहित है इसलिए भगवान सूर्य देव की विशेष कृपा का भी पात्र है यह रुद्राक्ष| बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने मात्र से असाध्य व भयानक रोगों से मुक्ति मिलती है | ह्रदय रोग, उदार रोग व मस्तिष्क से सम्बन्धित रोगों में इस रुद्राक्ष को धारण करने से लाभ हो सकता है ऐसा कई ग्रन्थों में लिखा मिलता है | बारह मुखी रुद्राक्ष को कंठ में या कान के कुण्डल में धारण करने से भगवान विष्णु व सूर्य देव दोनों ही अति प्रसन्न होते हैं | इस रुद्राक्ष को द्वादश आदित्यों की कृपा प्राप्त होने से अश्वमेघ यज्ञ सहित कई यज्ञों का फल प्राप्त होता है |

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) धारण करने से तन और मन स्वस्थ होते हैं और एक विशेष प्रकार की शक्ति उत्पन्न होती है | राजनीति व सरकारी क्षेत्रों में काम करने वाले जातकों के लिए बारह मुखी रुद्राक्ष अति उत्तम माना गया है | गोवध करने वाले पापी व रत्नों की चोरी करने जैसे महापाप में भी इस रुद्राक्ष के धारण करने से भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है और पापों से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है,  एैसा हमारे ग्रन्थों में कहा गया है | यह रुद्राक्ष क्षत्रुओं का नाश करके व्याधियों का नाश करके सूर्य आदि ग्रहों के कमज़ोर प्रभाव को नष्ट करके सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति करवाता है इसलिए इस रुद्राक्ष को सभी को धारण करना चाहिए|

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) के लाभ

बारहमुखी रूद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) को धारण करने से शरीर के प्रत्येक प्रकार के चर्म रोग, कोढ़, त्वचा एवं रक्त विकार दूर हो जाते हैं । सूर्य एवं राहु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए बारहमुखी रूद्राक्ष धारण करना अत्यन्त हितकर साबित होता है। शरीर के सभी प्रकार के हडड़ी रोगों को दूर करने के लिए बाहरमुखी रूद्राक्ष काफी सक्षम माना जाता है। मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए बारहमुखी रूद्राक्ष धारण करना विशेष हितकर रहता है।

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