
तन्नो सूर्य छठ पूजा सूर्य उपासना का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली पर्व है, जो आस्था के साथ-साथ विज्ञान से भी जुड़ा हुआ है। Worlds Best Astrologer के अनुसार, यह पर्व न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मकता का भी स्रोत है।
छठ पूजा का धार्मिक महत्व
छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यह सूर्य देव और उनकी बहन षष्ठी देवी को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
महाभारत काल से इस पर्व की परंपरा चली आ रही है। इस दिन श्रद्धालु नदी, तालाब या किसी जलाशय के किनारे खड़े होकर अस्ताचलगामी (डूबते सूर्य) और उदीयमान (उगते सूर्य) को अर्घ्य देते हैं।
छठ पूजा का वैज्ञानिक महत्व
छठ पूजा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया भी है। जब हम सूर्य को जल अर्पित करते हैं, तो जल की धारा से सूर्य की किरणें परावर्तित होकर शरीर पर पड़ती हैं, जिससे स्नायु तंत्र (Nervous System) सक्रिय होता है और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है।
कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन होता है और स्वास्थ्य को मजबूती मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार, अदरक, हल्दी, गाजर, मूली जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग शरीर को ऊर्जा और रोगों से रक्षा प्रदान करता है।
छठ पूजा की प्रमुख विधि
छठ पूजा चार दिनों का विशेष व्रत होता है:
- नहाय-खाय – पहले दिन शुद्ध भोजन से व्रत की शुरुआत
- खरना (लोहंडा) – दूसरे दिन व्रती दिनभर उपवास रखकर शाम को प्रसाद ग्रहण करते हैं
- संध्या अर्घ्य – तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है
- उषा अर्घ्य – चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होता है
इस दौरान व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं, जो अत्यंत कठिन और पुण्यदायी माना जाता है।
छठ पूजा की विशेषताएं
- यह पर्व स्वच्छता और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता है
- परिवार और समाज को एक साथ जोड़ता है
- देश-विदेश में रहने वाले भारतीय भी इसे श्रद्धा से मनाते हैं
- घाटों पर भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है
सूर्य देव के प्रभावशाली मंत्र
पुत्र प्राप्ति के लिए मंत्र
ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे।
धीमहि तन्नः सूर्य प्रचोदयात्।।
रोग निवारण (हृदय, नेत्र, पीलिया, कुष्ठ) के लिए मंत्र
ऊँ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः।
व्यवसाय वृद्धि के लिए मंत्र
ऊँ घृणिः सूर्य आदित्याय नमः।
शत्रु नाश के लिए मंत्र
शत्रु नाशाय ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।
मनोकामना पूर्ति के लिए मंत्र
ऊँ ह्रां ह्रीं सः।
ग्रह दोष निवारण के लिए मंत्र
ऊँ ह्रीं श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय नमः।
सूर्यदेव को चन्दन अर्पण मंत्र
दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।
विलेपनं रश्मिदाता चन्दनं प्रतिगृह्यताम्।।
वस्त्र अर्पण मंत्र
शीत-वातोष्ण संत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्।
देहालंकरणं वस्त्रं अतः शांति प्रयच्छ मे।।
सूर्यदेव की पूजा (उपवीत अर्पण) मंत्र
नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्।
उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर।।
घृत स्नान मंत्र
नवनीतसमुत्पन्नं सर्वसंतोषकारकम्।
घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।।
अर्घ्य समर्पण मंत्र
ऊँ सूर्यदेव नमस्तुभ्यं गृहाण करुणाकर।
अर्घ्यं च फलं संयुक्तं गन्धमाल्याक्षतैर्युतम्।।
गंगाजल अर्पण मंत्र
ऊँ सर्वतीर्थसमुद्भूतं पाद्यं गन्धादिभिर्युतम्।
प्रचण्डज्योति गृहाणेदं दिवाकर भक्तवत्सल।।
आसन अर्पण मंत्र
विचित्ररत्नखचितं दिव्यास्तरणसंयुतम्।
स्वर्णसिंहासनं चारु गृहाण रवि पूजितम्।।
आवाहन मंत्र
ऊँ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्।
स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्।।
दुग्ध स्नान मंत्र
कामधेनुसमुद्भूतं सर्वेषां जीवनं परम्।
पावनं यज्ञहेतुश्च पयः स्नानार्थं समर्पितम्।।
दीप अर्पण मंत्र
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।।
निष्कर्ष
छठ पूजा एक ऐसा महापर्व है, जो हमें प्रकृति, अनुशासन और आस्था से जोड़ता है। यह न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
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