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दक्षिणावर्ति शंख क्यों है सबसे खास – Acharya Indu Prakash
ज्योतिषहिंदी

दक्षिणावर्ति शंख क्यों है सबसे खास

हिन्दू धर्म में शंख की महत्वता कम नहीं हैं | शंख (Shankha) उन चुनिंदा सामग्रियों में शुमार है जो किसी भी पूजन में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं | इसकी उत्पत्ति माता लक्ष्मी की तरह ही समुद्र से हुई थी इसीलिए इसे माता लक्ष्मी के भाई की उपाधि दी गयी है | काफी समय पहले राजा महाराजाओं के दौर में जब युद्ध लड़े जाते थे तब शंख बजा कर ही युद्ध की शुरुआत होती थी | वैसे तो शंख कुल 3 प्रकार के बताये गये हैं, वामावर्ती, दक्षिणावर्ति (Dakshinavarti) और मध्यावर्ती शंख | पर आज हम बात करेंगे सिर्फ दक्षिणावर्ति शंख (Dakshinavarti Shankha) की |

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर, ऑफिस, दुकान या किसी जगह पर दक्षिणावर्ति शंख (Dakshinavarti Shankha) की स्थापना करने से उस जगह लक्ष्मी का वास होता है |

Dakshinavarti_Shankha_Acharya_Indu_Prakash

अगर आप दक्षिणावर्ति शंख (Dakshinavarti Shankha) के निम्न ये उपाय करते हैं तो शंख आपके लिए अत्यंत लाभकारी होगा |

– ज्योतिषशास्त्र (Astrology) के अनुसार, दक्षिणावर्ति शंख में गंगाजल या गाय के दूध को भरकर इसका छिडकाव करें, नकारात्मकता (Negativity) दूर होगी |

– यह मान्यता है की इस शंख की स्थापना करने पर गरीबी, असफ़लता, व्यापार (Business) में नुकसान जैसी परेशानियाँ नहीं आती |

– घर की तिजोरी अथवा दूकान के गल्ले में अगर दक्षिणावर्ति शंख रख कर नियमित रुप से इसका पूजन किया जाये तो शुभ परिणाम मिलते हैं |

– बुरे सपने आते हों तो दक्षिणावर्ति शंख से ऐसी समस्या से मुक्ति मिलती है |

– इस शंख से परिवार में शांति आती है |

दक्षिणावर्ति शंख (Dakshinavarti Shankha) की स्थापना करने के लिए सबसे पूर्व दूध और गंगाजल से इसका शुद्धिकरण करना चाहिए | फिर पूजन करने की जगह को साफ़ करें और शंख को एक लाल कपड़े पर आसन बना कर प्रतिष्ठित करें | अक्षत और रोली से शंख को भरें और उस पर स्वास्तिक (Swastika) का चिन्ह बनाये |

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