bhavishyavaniआध्यात्मिक

गोपाष्टमी – कैसे पाएं मां के कर्ज से मुक्ति

आज गौमाता को वस्त्र, अलंकार और हरा चारा देने से आप माता के कर्ज से मुक्त होकर उनका आशीर्वाद हासिल कर लेगे परिणाम स्वरुप आपकी हर मनोकामना सहज ही पूर्ण हो जायेगी |

गोपाष्टमी का पर्व ब्रज की संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है। गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का नाम ‘गोविन्द’ पड़ा जो बहुत लोक प्रिय है। कार्तिक, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा से सप्तमी तक गौ-गोप-गोपियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। इसी समय से अष्टमी को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा जिसकी परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। गोपाष्टमी की पूजा के लिये इस दिन प्रातः काल गायों को स्नान कराएँ तथा गंध-धूप-पुष्प आदि से पूजा करें और अनेक प्रकार के वस्त्रालंकारों से अलंकृत करके उनका पूजन करें, गायों को गौ-ग्रास देकर उनकी प्रदक्षिणा करें और थोड़ी दूर तक उनके साथ में जाएं तो सभी प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती हैं। गोपाष्टमी को सांयकाल गायें चरकर जब वापस आयें तो उस समय भी उनका अभिवादन और पंचोपचार पूजन करके कुछ भोजन कराएं और उनकी चरण रज को माथे पर धारण करें। उससे सौभाग्य की वृद्धि होती है। भारतवर्ष में प्रायः गोपाष्टमी का उत्सव बड़े ही हर्षो उल्लास से मनाया जाता है। विशेषकर गौशालाओं के लिए यह बड़े ही महत्त्व का उत्सव है। इस दिन गौशालाओं की संस्था में कुछ दान देना चाहिए। इस प्रकार से सारा दिन गौ-चर्चा में ही लगना चाहिए। गोपाष्टमी के पर्व का मूल उदेश्य गौ वंश की रक्षा करना व उससे सौभाग्य प्राप्त करना ही सच्ची श्रद्धा होगी। गोपाष्टमी के दिन गाय का आर्षिवाद लेने वालों को बड़ा पुण्य मिलता है। भक्तों द्वारा गाय को जो कुछ भी दिया जाता है वह मां का कर्ज उतारने के समान है। सेवा से विमुख होने के कारण मनुष्यों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है, अर्थात् गौ सेवा से इस समस्या से बचा जा सकता है। अतएव इस त्योहार की प्रासंगिकता आज की युग में और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इस दिन गायों को सजाया जाता है और मेंहदी, हल्दी, रोली से पूजन कर उन्हें तरह-तरह के भोजन कराये जाते हैं। गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है। यह गंगा, गायत्री, गीता, गोवर्धन और गोविन्द की तरह ही पूजनीय है। शास्त्रों में कहा गया है ‘मातर’ सर्वभूतानां गांव यानी गाय समस्त प्राणियों की माता है। इसी कारण आर्य संस्कृति में पनपे शैव, शाक्त, वैष्णव, जैन, बौद्ध, सिख आदि सभी धर्म-संप्रदायों में उपासना एवं कर्मकांड की पद्धतियों में भिन्नता होने पर भी सभी धार्मिक मान्यताओ में गौ के प्रति आदर भाव है। मान्यता है कि दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ पृथ्वी पर साक्षात देवी के समान हैं। यानी सनातन धर्म में गौ को दूध देने वाला एक निरा पशु न मानकर उसे देवताओं की प्रतिनिधि माना गया है। जिसकी हम सभी को हर संभव रक्षा करनी कहिए।

सर्वकामदुधे देवि सर्वतीर्थीभिषेचिनि।।

पावने सुरभि श्रेष्ठे देवि तुभ्यं नमोस्तुते।।

If you are facing problems in your carrier, married life, child problem or any other issue related to your life concern with Acharya Indu Prakash “Worlds Best Astrologer”. He is one of the most recognised experts in the field of Astrology. He is the most honest astrologer. For More Details or Information Call – 9971-000-226.

To know more about yourself. watch ‘Bhavishyavani’ show.

Leave a Response