narad

नारद मुनि – कैसे बने विश्व के प्रथम पत्रकार

“नारायण-नारायण” गाते हुए, वीणा की मधुर तान पर
भगवन्नाम में लीन देवर्षि नारद सदा आनंदमग्न रहते हैं।”

नारद मुनि केवल एक ऋषि नहीं, बल्कि सूचना, संवाद और भक्ति के दिव्य प्रतीक हैं। वे निरंतर तीनों लोकों – देवलोक, मृत्युलोक और पाताललोक – में विचरण करते हुए भगवान विष्णु की महिमा का प्रचार करते रहते हैं।

नारद मुनि – ब्रह्मांड के प्रथम पत्रकार

सूचना और संवाद के क्षेत्र में यदि किसी का नाम सबसे पहले आता है तो वह है देवर्षि नारद। अपनी वीणा की मधुर ध्वनि पर भगवान के गुणों का गान करते हुए वे हर स्थान की हर घटना से अवगत रहते थे।

देव, दानव, ऋषि, राजा – सभी उन्हें अपना विश्वसनीय संवाददाता मानते थे।
जहां कोई भ्रम होता, वहां नारद जी सत्य का प्रकाश पहुंचाते थे।

वेदों के संपादक और ब्रह्मज्ञान के वाहक

नारद मुनि ने वेदों का संपादन करके यह निश्चित किया कि—

  • कौन-सा मंत्र ऋग्वेद में जाएगा
  • कौन-सा मंत्र यजुर्वेद में
  • और कौन-सा साम या अथर्ववेद में

इस प्रकार वे वेदों की संरचना के महान शिल्पकार भी थे।

भगवान विष्णु के परम भक्त

नारद मुनि का जीवन केवल एक ही मंत्र से चलता है –
“नारायण… नारायण…”

हाथ में वीणा, मुख पर भगवान का नाम और हृदय में भक्ति – यही नारद जी की पहचान है।
ग्रंथों में उन्हें भगवान विष्णु का अवतार तक कहा गया है।

भगवान श्री कृष्ण स्वयं गीता में कहते हैं –

“देवर्षीणाम् च नारदः”
अर्थात् – देवर्षियों में मैं नारद हूँ।
(भगवद्गीता अध्याय 10, श्लोक 26)

शास्त्रों में नारद मुनि

नारद मुनि का उल्लेख अनेक ग्रंथों में मिलता है—

  • अथर्ववेद
  • मैत्रायणी संहिता
  • महाभारत (सभा पर्व)
  • पुराण और उपनिषद

महाभारत के अनुसार नारद जी—

वेदों के ज्ञाता,
पुराणों के विशेषज्ञ,
आयुर्वेद, ज्योतिष, व्याकरण, खगोल, भूगोल के विद्वान,
महान संगीतज्ञ,
प्रभावशाली वक्ता और
त्रिलोकी पर्यटक थे।

नारद मुनि की दिव्य लीलाएँ

नारद जी केवल उपदेशक नहीं, बल्कि ईश्वरीय योजनाओं के सूत्रधार भी थे। उन्होंने—

  • लक्ष्मी जी का विवाह विष्णु से कराया
  • जलंधर का वध शिव से करवाया
  • कंस को आकाशवाणी का अर्थ समझाया
  • वाल्मीकि को रामायण लिखने की प्रेरणा दी
  • व्यास से भागवत पुराण की रचना करवाई
  • प्रह्लाद और ध्रुव को महान भक्त बनाया

नारद जी के महान ग्रंथ

देवर्षि नारद ने अनेक दिव्य ग्रंथों की रचना की, जिनमें प्रमुख हैं—

  • नारद भक्ति सूत्र
  • नारद पंचरात्र
  • नारद परिव्राजक उपनिषद
  • बृहन्नारदीय उपपुराण
  • नारद महापुराण (25,000 श्लोक)

आज उपलब्ध नारद पुराण में लगभग 22,000 श्लोक हैं।
इसमें भक्ति, मोक्ष, धर्म, संगीत, ब्रह्मज्ञान और ज्योतिष का अद्भुत वर्णन है।

नारद जयंती – पत्रकारिता का आध्यात्मिक उत्सव

नारद मुनि को पहला पत्रकार माना जाता है।
इसी स्मृति में ज्येष्ठ मास की कृष्ण प्रतिपदा को नारद जयंती मनाई जाती है।

इस दिन—

  • नारद पत्रकार सम्मान समारोह
  • सामाजिक गोष्ठियाँ
  • पत्रकारों का सम्मान
    किया जाता है।

नारद कुंड – मथुरा की दिव्य भूमि

ब्रजभूमि के गोवर्धन से राधाकुंड मार्ग पर स्थित नारद कुंड
देवर्षि नारद की तपोभूमि है।

यहीं उन्होंने—

  • देवर्षि पद के लिए तप किया
  • ध्रुव को गुरु मंत्र दिया
  • कयाधु को भक्ति का ज्ञान दिया, जिससे प्रह्लाद का जन्म हुआ

यहाँ स्थित पारस पीपल वृक्ष पर चार रंग के फूल खिलते हैं।
मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

निष्कर्ष

देवर्षि नारद केवल ऋषि नहीं, बल्कि
भक्ति, संवाद, ज्ञान और सत्य के अमर प्रतीक हैं।

आज भी जब कोई सत्य को फैलाने का संकल्प लेता है,
तो उसमें कहीं न कहीं नारद की आत्मा जागृत होती है।

 

If you are facing problems in your carrier, married life, child problem or any other issue related to your life concern with Acharya Indu Prakash “Worlds Best Astrologer” For More Details or Information Call – 9971-000-226.

To know more about yourself. watch ‘Bhavishyavani‘ show.

Leave a Comment