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नकारत्मकता को दूर करने का उपाय, 9 मुखी रुद्राक्ष

माँ दुर्गा के नौ रूपों की शक्तियां नौ मुखी रुद्राक्ष (9 mukhi rudraksha) में निहित हैं | इस रुद्राक्ष को स्वयं माँ दुर्गा का अशिर्वाद प्राप्त है | माँ दुर्गा के नौ रूपों में मां शैलपुत्री, ब्रहमचारिणी, चन्द्रघण्टा, कुष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं | काल भैरव के आशीर्वाद से कोई भी […]

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वैशाख मास शुरू, भगवान विष्णु की करें पूजा

20 अप्रैल 2019 से वैशाख (Vaisakh) यम नियम शुरु होने वाला है | मान्यता के अनुसार इस माह के दौरान भगवान विष्णु की पूजा होती है | इस दौरान भगवान विष्णु की माधव नाम से पूजा की जाती है। जानकारी के लिये बता दूं कि वैशाख (Vaisakh) मास का एक नाम माधव मास भी है।

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आत्मविश्वास और बल पाने के लिए धारण करें 11 मुखी रुद्राक्ष

गयारह मुखी रुद्राक्ष (11 mukhi rudraksha) को भगवान शिव के ग्यारवें अवतार भगवान हनुमान का प्रतिक माना गया है | मान्यता के अनुसार इसमें ग्यारह रुद्रों की शक्ति भी विद्यमान है | ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को उसपे बनी ग्यारह धारियों से पहचान सकते हैं | भगवान शिव जी का आशीर्वाद पाने के लिए भी यह

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शुभ योग

शुभ योग होने पर भी क्यों बनी रहती है आर्थिक परेशानियां

भारतीय ज्योतिषशास्त्र व पुराणों के अनुसार कर्म को प्रधान माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में सभी राशियों में ग्रह-नक्षत्र की अलग-अलग स्थिति होती है। ज्योतिष शास्त्र में हर राशि के लिए समस्याओं से बचने के लिए कुछ खास उपाय बताए गए हैं। पौराणिक मान्यताओ के अनुसार भारतीय धार्मिक शास्त्रों में माँ लक्ष्मी को अत्याधिक महत्व

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क्या मंगल दोष को समाप्त किया जा सकता है ?

मंगल उग्र प्रकृति का ग्रह होने के कारण पाप ग्रह माना जाता है। विवाह के संदर्भ में मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव का विचार विशेषतौर पर किया जाता है क्योंकि मंगलिक दोष का निर्माण मंगल की स्थिति से होता है जिसे दाम्पत्य जीवन के लिए शुभ योग नहीं माना जाता है। एक अनुमान के अनुसार

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अनिद्रा, वास्तु दोष, जादू टोने के असर से बचाव करता है दस मुखी रुद्राक्ष

10 मुखी रुद्राक्ष (10 mukhi rudraksha) को स्वयं भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त है | साथ ही साथ इसे यमराज और दस दिशों क स्वामी का वरदान भी प्राप्त है | अगर आप इस रुद्राक्ष को धारण करते हैं तो आपको स्वयं ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा | अब आप जानिए की दस

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हनुमान जयंती में किये जाने वाले उपाय

धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमान जंयती (Hanuman Jayanti) को भगवान हनुमान के जन्‍म के उपलक्ष्‍य में चैत्र मास के पू्र्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान जी की पूजा सभी हिंदुओं के द्वारा की जाती है और कई मंदिर भी हनुमान जी को समर्पित होते हैं। जिन मंदिरों में भगवान राम की पूजा होती है वहां

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वृषभ संक्रांति स्नान-ध्यान का महत्व

भारतीय ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन करना एक अहम घटना माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन से जातकों के राशिफल पर तो असर पड़ता ही है साथ ही सूर्य के इस परिवर्तन से सौर वर्ष के मास की गणना भी की जाती है। कहते हैं सूर्य देव पूरे वर्ष में एक एक

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मेष संक्रांति है सभी पर्वों में विशेष

14 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर सूर्य मीन राशि से परिवर्तित होकर मेष राशि में आ रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्य को क्रूर ग्रह माना जाता है और यह जातक के जीवन में कई शुभ अशुभ प्रभाव डालता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि सूर्य का राशि परिवर्तन

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नवरात्र के तीसरे दिन, मां चंद्रघंटा का पूजन

नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरुप की उपासना की जाती है । इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा पूजी जाती हैं । मां चंद्रघंटा (Chandraghanta) के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा (Chandraghanta) के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा

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