त्योहारहिंदी

क्या है विवाह पंचमी खास

भारत में अनेकों राज्यों में विवाह पंचमी (Vivah Panchami) को बड़ी धूमधाम व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक धार्मिक ग्रथों के अनुसार इस पर्व का उद्गमन भगवान राम ने जनक नंदिनी सीता से विवाह इस पुण्य-पवित्र पंचमी तिथि में किया था। जिस कारण इस परम-पवित्र तिथि को विवाह पंचमी के नाम से सम्बोधित करने लगे। जिसका वर्णन श्री राम चरितमानस में महाकवि गोस्वामी तुलसी दास जी ने बड़ी ही सुंदरता से किया है। श्री राम चरितमानस के अनुसार- महाराजा जनक ने सीता के विवाह हेतु स्वयंवर रचाया। सीता के स्वयंवर में आए सभी राजा-महाराजा जब भगवान शिव का धनुष नहीं उठा सकें, तब ऋषि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से आज्ञा देते हुए कहा- हे राम! उठो, शिवजी का धनुष तोड़ो और जनक का संताप मिटाओ।

आपके विवाह में आ रही समस्याओं का कारण व समाधान जानने के लिए आचार्य इंदु प्रकाश जी से परामर्श प्राप्त करें |

विवाह पंचमी (Vivah Panchami) का महत्व व कथा

गुरु विश्वामित्र के वचन सुनकर श्रीराम तत्पर उठे और धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए आगे बढ़ें। यह दृश्य देखकर सीता के मन में उल्लास छा गया।

श्रीराम ने देखते ही देखते भगवान शिव का महान धनुष उठाया। इसके बाद उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही एक भयंकर ध्वनि के साथ धनुष टूट गया। यह देखकर सीता के मन को संतोष हुआ। फिर सीता श्रीराम के निकट आईं। तब एक सखी ने सीता से जयमाला पहनाने को कहा। तब सीताजी ने श्रीराम के गले में जयमाला पहना दी। यह दृश्य देखकर देवता फूल बरसाने लगे। नगर और आकाश में बाजे बजने लगे।

श्रीराम-सीता की जोड़ी इस प्रकार सुशोभित हो रही थी, मानो सुंदरता और श्रृंगार रस एकत्र हो गए हो। पृथ्वी, पाताल और स्वर्ग में यश फैल गया कि श्रीराम ने धनुष तोड़ दिया और सीताजी का वरण कर लिया। इसी के मद्देनजर प्रतिवर्ष अगहन मास की शुक्ल पंचमी को प्रमुख राम मंदिरों में विशेष उत्सव मनाया जाता है।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम-सीता के शुभ विवाह के कारण ही यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दम्पत्ति माने गए हैं।

जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने सदा मर्यादा पालन करके पुरुषोत्तम का पद पाया, उसी तरह माता सीता ने सारे संसार के समक्ष पतिव्रता स्त्री होने का सर्वोपरि उदाहरण प्रस्तुत किया। इस पावन दिन सभी को राम-सीता की आराधना करते हुए अपने सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए प्रभु से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

Leave a Response


Warning: Cannot assign an empty string to a string offset in /home/customer/www/acharyainduprakash.com/public_html/blog/wp-includes/class.wp-scripts.php on line 492