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चैतन्य महाप्रभु जयंती – कौन है चैतन्य महाप्रभु

वौष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखने वाले चैतन्य महाप्रभु भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक थे, जो वैष्णव धर्म के भक्ति योग के प्रचारक भी रहे हैं । इनका जन्म 1486 में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पश्चिम बंगाल के नवद्वीप (नादिया नामक गांव) में हुआ था। ये कृष्ण के परम भक्त थे । महाप्रभु ने राजनैतिक अस्थिरता के दिनों में हिंदू मुस्लिम एकता की सद्भावना को बल दिया, साथ ही इन्होंने दूसरों को जाति-पात व ऊंच-नीच की भावना को दूर करने की शिक्षा भी दी । चैतन्य महाप्रभु के द्वारा प्रारंभ किए गए महामंत्र नाम के संकीर्तन का व्यापक व सकारात्मक प्रभाव आज भी पश्चिमी जगत तक देखने को मिलता है । अपने जीवन का अंतिम समय इन्होंने वृंदावन में ही बिताया था । वैष्णव लोग तो इन्हें राधा-श्रीकृष्ण का ही अवतार मानते थे । हालांकि चैतन्य महाप्रभु द्वारा लिखे गए उनके आठ श्लोक मात्र ही इस समय उपलब्ध हैं, जिन्हें ‘शिक्षाष्टक’ कहा जाता है |

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