आध्यात्मिक

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धनतेरस का महत्व

अखंड भारत वर्ष में दीपावली के महापर्व से दो दिन पूर्व धन के देव धन्वन्तरिकी पूजा बड़े ही उल्लास के साथ की जाती है आम तौर पर इस पर्व को धनतेरस (Dhanteras) नाम से मनाया जाता है। माना जाता है की इस दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था  है। यह पर्व हर साल कार्तिक

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शरद पूर्णिमा का महत्व

भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार व अखंड ज्योतिष गणना के द्वारा हर माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा होती है। यह स्थिति चन्द्रमा की कलाओं पर निर्धारित दो पक्षों (अमावस्या व पूर्णिमा) में बंटी रहती है। धार्मिक रूप से पूर्णिमा तिथि बहुत ही सौभाग्यशाली मानी जाती है। इसलिये सम्पूर्ण विश्व में ज्योतिष शास्त्र

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माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप तथा महत्व

श्री दुर्गा का नवम रूप माता श्री सिद्धिदात्री (Maa Sidhidatri) है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ये अनेको सिद्धियां प्राप्त की थीं। सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण

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नवरात्र में माता कालरात्रि का पूजन

नवरात्र के सातवें दिन माँ भगवती दुर्गा के कालरात्रि (Maa Kalratri) रूप की पूजा की जाती है। शास्‍त्रों के अनुसार बुरी शक्तियों से पृथ्‍वी को बचाने और पाप को फैलने से रोकने के लिए मां ने अपने तेज से इस रूप को उत्‍पन्‍न किया था इनका रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि (Maa

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माँ कात्यायनी के पूजन से मिलेगा मन चाहा वर

नवरात्रि की धूम हर तरफ है। घर हो या मंदिर, हर जगह माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना हो रही है। नवरात्रि के छठे दिन देवी के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी (Maa Katyayani) की पूजा-अर्चना का विधान है। इसी तिथि में देवी ने जन्म लिया था और महर्षि ने इनकी पूजा की थी |

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माँ स्कंदमाता देती हैं मोक्ष का आशीर्वाद

श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता (Maa skandmata) हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता (Skanda mata) कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। इनकी आराधना से

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कुष्मांडा देवी का पूजन नवरात्र के चौथे दिन

देवी कुष्मांडा (Kushmanda Devi) माँ दुर्गा का चौथा स्वरुप हैं | बहुत समय पहले, जब श्रृष्टि का कोई वजूद नहीं था और हर तरफ अन्धकार था, तब मान्यता है की इन्ही माता की मंद हंसी से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी | इसीलिए इनका नाम आदिशक्ति और आदिस्वरुपा भी है | आठ भुजाएं होने के

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नवरात्र में कैसे करें माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न

नवरात्र का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा (Maa Chandraghanta) को समर्पित होता है | माता शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी के बाद तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है | माथे पर घंटे के आकार का चंद्र होने के कारण इन देवी को चंद्रघंटा कहा जाता है | सिंह पर सवार माता का शरीर स्वर्ण जितना

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माता महालक्ष्मी व्रत से होगी धन की वृद्धि

नीके दिन जब आइहैं, बनत न लगिहैं देर जब एक हुआ तो दस होते दस हुए तो सौ की इच्छा है | सौ पाकर भी यह सोच हुआ की सहस्त्र हों तो अच्छा है | बस यही हाल है हम सब का जिसके पास जितना है उससे और अधिक की लालसा बनी रहती है हम

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नवरात्र के दुसरे दिन पूजें माँ ब्रह्चारिणी

जैसा की नवरात्रि के दौरान नौ विशेष रात्रियों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है | इसमें पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है, जिससे भक्त माता से भूमि, भवन और वाहन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं | फिर दुसरे दिन माता

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