Astrology

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राशियों द्वारा ग्रहों के उच्च-नीच, उदय-अस्त व राहु केतू का ज्ञान

भारतीय ज्योतिष में 9 ग्रह बताए गए हैं। इसमें 2 छाया ग्रह हैं। सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि ग्रह हैं जो आकाशीय मंडल में दृष्टमान हैं। राहु-केतु छाया ग्रह हैं, जो ग्रह नहीं हैं क्योंकि ये आकाशीय मंडल में दिखाई नहीं देते हैं। मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि ये ग्रह समय-समय पर उदय, […]

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इस शनिश्चरी अमावस्या पाईये शनि देव का आशीर्वाद

जब अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे शनिश्चरी अमावस्या (Shanishchari Amavasya) कहा जाता है। यह तिथि शनि देव की उपासना और उनके कृपा-प्राप्ति का सबसे श्रेष्ठ अवसर मानी जाती है। 2026 में शनिश्चरी अमावस्या 18 जुलाई (शनिवार) को पड़ रही है। इस दिन भगवान शनि की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव और पितरों

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मेष राशि – तुला राशि में बुध गोचर – 3 अक्टूबर 2025

बुध करेंगे मेष राशि में प्रवेश

मेष राशि – तुला राशि में बुध गोचर – 3 अक्टूबर 2025 3 अक्टूबर 2025 को बुध ग्रह तुला राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, व्यापार, संवाद, तर्कशक्ति और गणित का कारक माना गया है। जब बुध मेष राशि से तुला राशि में गोचर करते हैं, तो यह कई राशियों पर

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नकारत्मकता को दूर करने का उपाय, 9 मुखी रुद्राक्ष

माँ दुर्गा के नौ रूपों की शक्तियां नौ मुखी रुद्राक्ष (9 mukhi rudraksha) में निहित हैं | इस रुद्राक्ष को स्वयं माँ दुर्गा का अशिर्वाद प्राप्त है | माँ दुर्गा के नौ रूपों में मां शैलपुत्री, ब्रहमचारिणी, चन्द्रघण्टा, कुष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं | काल भैरव के आशीर्वाद से कोई भी

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आत्मविश्वास और बल पाने के लिए धारण करें 11 मुखी रुद्राक्ष

गयारह मुखी रुद्राक्ष (11 mukhi rudraksha) को भगवान शिव के ग्यारवें अवतार भगवान हनुमान का प्रतिक माना गया है | मान्यता के अनुसार इसमें ग्यारह रुद्रों की शक्ति भी विद्यमान है | ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को उसपे बनी ग्यारह धारियों से पहचान सकते हैं | भगवान शिव जी का आशीर्वाद पाने के लिए भी यह

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अनिद्रा, वास्तु दोष, जादू टोने के असर से बचाव करता है दस मुखी रुद्राक्ष

10 मुखी रुद्राक्ष (10 mukhi rudraksha) को स्वयं भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त है | साथ ही साथ इसे यमराज और दस दिशों क स्वामी का वरदान भी प्राप्त है | अगर आप इस रुद्राक्ष को धारण करते हैं तो आपको स्वयं ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा | अब आप जानिए की दस

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जीवन के सुख-दुख के सहारे के लिए ज्योतिष का बड़ा योगदान है

ज्योतिषशास्त्र (Astrology) का प्रधान कार्य मानव जीवन को फलादेश कर्म से जोड़े रखना ही है। कर्म के परिपाक को व कर्म के फल को अभिव्यक्ति करना ही ज्योतिष का कार्य है। जिस प्रकार अंधकार में स्थित वस्तुओं का दर्शन दीप के सहारे होता है ठीक उसी तरह ज्योतिष (Astrology) के अनुसार ग्रहों के सहारे कर्म

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कुंडली में कैसे बन जाते है धोखा-धड़ी जैसे योग

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, योग और दृष्टि बहुत महत्वपूर्ण रहती है और इन्हीं पर सम्पूर्ण ज्योतिष शास्त्र निर्भर रहता है कि कौन जातक प्रेम में धोखा देगा और कौन कामयाब होगा। कुंडली में प्रेम (love) के लिए पांचवां और वैवाहिक जीवन के लिए सातवां भाव बहुत महत्वपूर्ण है। सातवें भाव

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मंगल ग्रह का जीवन पर प्रभाव

भारतीय अखंड ज्योतिष शास्त्र में मंगल (Mangal) ग्रह को कालपुरुष का पराक्रमी सेनापति ग्रह माना गया है। ब्रहमाण्ड में स्थित मंगल (Mangal) ग्रह पराक्रम, स्फूर्ति साहस, आत्मविश्वास, रक्त, भूमि, धैर्य, देश प्रेम, छोटे भाई-बहन, आन्तरिक बल, अचल सम्पति, दृढ़ता, महत्वाकांक्षा, खतरे उठाने की शक्ति, क्रोध, घृणा, उत्तेजना, झूठ, नैतिकता की हानि का कारक ग्रह है.

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