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आत्मविश्वास और बल पाने के लिए धारण करें 11 मुखी रुद्राक्ष

गयारह मुखी रुद्राक्ष (11 mukhi rudraksha) को भगवान शिव के ग्यारवें अवतार भगवान हनुमान का प्रतिक माना गया है | मान्यता के अनुसार इसमें ग्यारह रुद्रों की शक्ति भी विद्यमान है | ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को उसपे बनी ग्यारह धारियों से पहचान सकते हैं | भगवान शिव जी का आशीर्वाद पाने के लिए भी यह […]

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शुभ योग होने पर भी क्यों बनी रहती है आर्थिक परेशानियां

भारतीय ज्योतिषशास्त्र व पुराणों के अनुसार कर्म को प्रधान माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में सभी राशियों में ग्रह-नक्षत्र की अलग-अलग स्थिति होती है। ज्योतिष शास्त्र में हर राशि के लिए समस्याओं से बचने के लिए कुछ खास उपाय बताए गए हैं। पौराणिक मान्यताओ के अनुसार भारतीय धार्मिक शास्त्रों में माँ लक्ष्मी को अत्याधिक महत्व

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अनिद्रा, वास्तु दोष, जादू टोने के असर से बचाव करता है दस मुखी रुद्राक्ष

10 मुखी रुद्राक्ष (10 mukhi rudraksha) को स्वयं भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त है | साथ ही साथ इसे यमराज और दस दिशों क स्वामी का वरदान भी प्राप्त है | अगर आप इस रुद्राक्ष को धारण करते हैं तो आपको स्वयं ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा | अब आप जानिए की दस

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नवमी का हवन से मिलेगी सकारात्मकता

नवरात्र के नवमी (Navmi) तिथि को हवन करने की मान्यता है । इस दिन आप तिल, जौ और गुग्गुल को मिलाकर हवन करें । हवन में जौ के मुकाबले तिल दो गुना होना चाहिए और गुग्गुल आदि हवन सामग्री जौ के बराबर होनी चाहिए। हवन के दौरान यह मंत्र के साथ आहुति दें | मंत्र

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मेष संक्रांति है सभी पर्वों में विशेष

14 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर सूर्य मीन राशि से परिवर्तित होकर मेष राशि में आ रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्य को क्रूर ग्रह माना जाता है और यह जातक के जीवन में कई शुभ अशुभ प्रभाव डालता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि सूर्य का राशि परिवर्तन

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नवरात्र के तीसरे दिन, मां चंद्रघंटा का पूजन

नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरुप की उपासना की जाती है । इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा पूजी जाती हैं । मां चंद्रघंटा (Chandraghanta) के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा (Chandraghanta) के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा

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क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया, क्या है इसका महत्व ?

हिंन्दू धर्म के अनुसार अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) वैशाख मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचागं देखने की जरूरत नहीं है। अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर किए गए कार्यों का कई गुना फल प्राप्‍त होता है। इसे

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12 राशियों के स्वामी और उनके प्रभाव

ज्योतिष के अनुसार 12 राशियों और 9 ग्रहों का वर्णन मिलता है। ये सभी 12 राशियाँ इन सभी 9 ग्रहों के द्वारा ही संचालित होती है। यानि प्रत्येक राशि (rashi) किसी न किसी ग्रह के अधीन होती है। जिसमें से सूर्य और चंद्रमा को छोड़कर सभी ग्रहों को 2-2 राशियाँ मिलती है। यानि सूर्य और

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शुक्ल योग में मासिक शिवरात्रि

आज का दिन आप सभी के लिए बहुत शुभ रहेगा क्योकि आज के दिन शुक्ल योग बन रहा है, जो की शुभ योग माना जाता है | आज रात 09 बजकर 47 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा। इस योग में भगवान की कृपा से आपको हर काम में सफलता मिलेगी | इस योग में मन्त्र

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सेहत और दाम्पत्य जीवन, दोनों में लाभदायक है यह रुद्राक्ष

देवेश्वर  कहे जाने वाले दो मुखी रुद्राक्ष (Rudraksha) में शिव पार्वती दोनों का वास माना जाता है |  यह रुद्राक्ष काफी दुर्लभ एंड कल्याणकारी माना गया है | किसी भी रुद्राक्ष (Rudraksha) की पहचान उसमे मौजूद रेखाओं से होता है | जितनी रेखाएं रुद्राक्ष में होती हैं. उस रुद्राक्ष के उतने हे मुख होते हैं

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