acharya indu prakash

Kaal Bhairav Jayanti acharya indu prakash

जब आपस में लड़ पड़े ब्रह्मा, विष्णु और महेश

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की जयंती (Kaal Bhairav Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। इसे कालाष्टमी अथवा भैरवाष्टमी भी कहा जाता है। भगवान काल भैरव की पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि अपने आप को श्रेष्ठ बताने के लिये अक्सर दूसरे को कम ताकतवर समझा जाता […]

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guru nanak ji

गुरु नानक जयंती क्यों है इतनी खास

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जी (Guru Nanak Ji) का जन्मदिन मनाया जाता है| 15 अप्रैल 1469 को पंजाब के तलवंडी जो कि अब पाकिस्तान में हैं और जिसे ननकाना साहिब के नाम से भी जाना जाता है, में गुरु नानक ने माता तृप्ता व कृषक पिता कल्याणचंद के घर जन्म लिया| गुरू नानक

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Chhath Puja Acharya Indu Prakash

महापर्वों में अनोखा पर्व है छठ पूजा

छठ व्रत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार भगवान सूर्य देव को समर्पित एक विशेष पर्व है। भारत के कई हिस्सों में खास कर यूपी और बिहार में तो इसे महापर्व माना जाता है। शुद्धता, स्वच्छता और पवित्रता के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व

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dhan varsha mata laskhami acharya indu prakash

इस दीपावली कैसे करें अपने घर में धन वर्षा

दिवाली (Diwali Dhan Varsha) एक ऐसा त्यौहार है जिसे सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया बढ़े हर्ष और भक्तिभाव से मनाया जाता है | यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक है | इस त्यौहार से हमें यह सीख मिलती है की अहंकार और बुराई कितनी ही बढ़ी क्यों ना हो

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Bhaiya duj acharya indu prakash

क्यों मनाया जाता है भाई दूज

दूज पर्व, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और स्नेह का प्रतीक है। भाई दूज (Bhai Duj) या भैया दूज पर्व को भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि नामों से मनाया जाता है। भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाने वाला पर्व है। यह तिथि दीपावली के दूसरे दिन आती है।

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dev diwali acharya indu prakash ji

देव दिवाली का महत्व

दिवाली के बाद पंद्रहवें दिन कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली (Dev Diwali) का पर्व मानाया जाता है। हर त्योहार की तरह यह त्योहार भी कई राज्यों में मनाया जाता है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा उत्साह बनारस में देखने को मिलता है. इस दिन मां गंगा की पूजा की जाती है। गंगा के तटों का नजारा

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govats dwadashi astrology

गोवत्स द्वादशी क्यों है खास

कार्तिक कृष्ण द्वादशी को गोवत्स द्वादशी (Govats Dwadashi) के नाम से जाना जाता है। इसे बछ बारस का पर्व भी कहते हैं। गुजरात में इसे वाघ बरस भी कहते हैं. यह एकादशी के बाद आता है। गोवत्स द्वादशी के दिन गाय माता और बछड़े की पूजा की जाती है। यह पूजा गोधुली बेला में की

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शरद पूर्णिमा का महत्व

भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार व अखंड ज्योतिष गणना के द्वारा हर माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा होती है। यह स्थिति चन्द्रमा की कलाओं पर निर्धारित दो पक्षों (अमावस्या व पूर्णिमा) में बंटी रहती है। धार्मिक रूप से पूर्णिमा तिथि बहुत ही सौभाग्यशाली मानी जाती है। इसलिये सम्पूर्ण विश्व में ज्योतिष शास्त्र

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दशहरे त्यौहार का महत्व

प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति वीरता और शौर्य की उपासक रही है। भारतीय संस्कृति कि गाथा इतनी निराली है कि देश के अलावा विदेशों में भी इसकी गूँज सुनाई देती है| तभी तो पुरी दुनिया ने भारत को विश्व गुरु माना है। दशहरा केवल त्योहार ही नही बल्कि इसे कई बातों का प्रतीक भी

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नवरात्रों में मां सरस्वती का पूजन व विसर्जन

शास्त्रों के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा शारदीय नवरात्रों में पंचमी तिथि में होती है और उनका विसर्जन षष्ठी तिथि में किया जाता है। जिन लोगों ने मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की है उन्हें मूर्ति का विसर्जन करके मूर्ति को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। कहा जाता है कि माता सरस्वती (Saraswati Mata) के

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