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इस दीपावली कैसे करें अपने घर में धन वर्षा

दिवाली (Diwali Dhan Varsha) एक ऐसा त्यौहार है जिसे सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया बढ़े हर्ष और भक्तिभाव से मनाया जाता है | यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक है | इस त्यौहार से हमें यह सीख मिलती है की अहंकार और बुराई कितनी ही बढ़ी क्यों ना हो […]

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Darsha amavasya chandra dev astrology

इस वर्ष दर्श अमावस्या के दिन बन रहा है यह योग

भारतीय धर्म ग्रंथों में चन्द्रमा की 16वीं कला को ‘अमा’ कहा गया है। चन्द्रमंडल की ‘अमा’ नाम की महाकला है जिसमें चन्द्रमा की 16 कलाओं की शक्ति शामिल है। शास्त्रों में अमा के अनेक नाम आए हैं, जैसे अमावस्या, सूर्य-चन्द्र संगम, पंचदशी, अमावसी, अमावासी या अमामासी। अमावस्या के दिन चन्द्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका

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क्यों मनाया जाता है भाई दूज

क्यों मनाया जाता है भाई दूज

भाई दूज (Bhai Dooj) या भैया दूज, यम द्वितीया के नाम से जाना जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अटूट प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, जो दीपावली के  दूसरे दिन पड़ती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक

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govats dwadashi astrology

गोवत्स द्वादशी क्यों है खास

कार्तिक कृष्ण द्वादशी को गोवत्स द्वादशी (Govats Dwadashi) के नाम से जाना जाता है। इसे बछ बारस का पर्व भी कहते हैं। गुजरात में इसे वाघ बरस भी कहते हैं. यह एकादशी के बाद आता है। गोवत्स द्वादशी के दिन गाय माता और बछड़े की पूजा की जाती है। यह पूजा गोधुली बेला में की

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माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप तथा महत्व

श्री दुर्गा का नवम रूप माता श्री सिद्धिदात्री (Maa Sidhidatri) है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ये अनेको सिद्धियां प्राप्त की थीं। सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण

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माँ स्कंदमाता देती हैं मोक्ष का आशीर्वाद

श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता (Maa skandmata) हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता (Skanda mata) कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। इनकी आराधना से

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नवरात्र में कैसे करें माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न

नवरात्र का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा (Maa Chandraghanta) को समर्पित होता है | माता शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी के बाद तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है | माथे पर घंटे के आकार का चंद्र होने के कारण इन देवी को चंद्रघंटा कहा जाता है | सिंह पर सवार माता का शरीर स्वर्ण जितना

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इस दिन मिलता है भवन और वाहन का आशीर्वाद

नवरात्र (Navratri) यानि नौ विशेष रात्रियां | इन रात्रियों में आदिशक्ति के नौ रूपों का पूजन किया जाता है | नवरात्री के हर दिन एक अलग देवी की पूजा का विधान है | हर एक दिन एक देवी को समर्पित है, उनके निर्धारित दिन पर उनकी पूजा करने पर माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं और

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कहाँ से हुई कांवड़ यात्रा की शुरुआत ?

श्रावण माह में कईं शिव भक्त कांवड़ यात्रा (Kanwad Yatra) के लिए निकल जाते हैं | सडकों पर भक्तों की लम्बी-लम्बी कतारें कावड ले जाते हुए देखने को मिलते हैं | श्रावण का यह महिना सभी भक्तों का स्वाभाव भक्तिमय कर देता है | यह महिना खास तौर पर भगवान शिव जी (Shiv Ji) को

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Greatest Friendship history

इतिहास के कुछ अमर दोस्तों की जोड़ी

दोस्ती  वह रिश्ता है जो कोई उम्र, जात, रंग, रिश्ता, धर्म नहीं देखता | इसे सिर्फ साफ़ दिल से निभाया जा सकता है, बिना किसी मोह के | हमारे पौराणिक कथाओं में बहुत सी कहानियाँ शामिल हैं जो ऐसे ही कुछ दोस्तों की मिसालें देती हैं | दोस्ती का नाम ज़बान पर आते ही यह

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