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कैसे हुई सफला एकादशी व्रत की शुरुआत

पौराणिक कथाओं के अनुसार एकादशी व्रत कथा व महत्व हर हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ व्यक्ति जानता होगा । हर मास की कृष्ण व शुक्ल पक्ष को मिलाकर दो एकादशियां आती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। लेकिन यह बहुत कम जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी जिनका जन्म भी […]

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क्या है आपकी समस्याओं का कारण

जन्मकुंडली के शुभ और अशुभ ग्रहों का प्रभाव हर जातक पर पड़ता है। कुंडली में स्थित ऐसे ग्रहों के कारण जातक को घर-परिवार में कलह (Grah Kalesh) होता रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा के साथ शनि-राहु बैठ गया तो जातक पीड़ित हो जाता है। जिस कारण मन दुखी रहता है। ऐसे जातक में

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विवाह की समस्याओं को कैसे करें दूर

हर माता-पिता अपने पुत्र-पुत्री के लिए योग्य वर ढुंढना तो पहले से ही शुरु कर देते हैं। लेकिन विवाह (Marriage) के लिए शुभ समय, शुभ मुहूर्त का इंतजार करते हैं। उनका यह इंतजार उनकी चिंता बढ़ाता हैं। हर वो लड़की-लड़का जो अपने जीवन के सबसे सुनहरे पल का बेसबरी से इंतजार कर रहे होते है।

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12 मुखी रुद्राक्ष से प्राप्त होती है सूर्य की कृपा

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) भगवान महा विष्णु का स्वरुप माना गया है| बारह आदित्यों का तेज इस रुद्राक्ष में सम्माहित है इसलिए भगवान सूर्य देव की विशेष कृपा का भी पात्र है यह रुद्राक्ष| बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने मात्र से असाध्य व भयानक रोगों से मुक्ति मिलती है | ह्रदय रोग, उदार

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कौन है स्कंद, क्या होती है स्कंद षष्टि

यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्कंद को समर्पित होने के कारण स्कंद षष्ठी (Skanda Sashti) के नाम से जाना जाता है। जैसे गणेश जी के लिए महीने की चतुर्थी के दिन पूजा–अर्चना की जाती है उसी प्रकार उनके बड़े भाई कार्तिकेय या स्कंद के लिए महीने की षष्ठी के दिन उपवास

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जब आपस में लड़ पड़े ब्रह्मा, विष्णु और महेश

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की जयंती (Kaal Bhairav Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। इसे कालाष्टमी अथवा भैरवाष्टमी भी कहा जाता है। भगवान काल भैरव की पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि अपने आप को श्रेष्ठ बताने के लिये अक्सर दूसरे को कम ताकतवर समझा जाता

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गुरु नानक जयंती क्यों है इतनी खास

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जी (Guru Nanak Ji) का जन्मदिन मनाया जाता है| 15 अप्रैल 1469 को पंजाब के तलवंडी जो कि अब पाकिस्तान में हैं और जिसे ननकाना साहिब के नाम से भी जाना जाता है, में गुरु नानक ने माता तृप्ता व कृषक पिता कल्याणचंद के घर जन्म लिया| गुरू नानक

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महापर्वों में अनोखा पर्व है छठ पूजा

छठ व्रत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार भगवान सूर्य देव को समर्पित एक विशेष पर्व है। भारत के कई हिस्सों में खास कर यूपी और बिहार में तो इसे महापर्व माना जाता है। शुद्धता, स्वच्छता और पवित्रता के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व

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इस वर्ष दर्श अमावस्या के दिन बन रहा है यह योग

भारतीय धर्म ग्रंथों में चन्द्रमा की 16वीं कला को ‘अमा’ कहा गया है। चन्द्रमंडल की ‘अमा’ नाम की महाकला है जिसमें चन्द्रमा की 16 कलाओं की शक्ति शामिल है। शास्त्रों में अमा के अनेक नाम आए हैं, जैसे अमावस्या, सूर्य-चन्द्र संगम, पंचदशी, अमावसी, अमावासी या अमामासी। अमावस्या के दिन चन्द्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका

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देव दिवाली का महत्व

दिवाली के बाद पंद्रहवें दिन कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली (Dev Diwali) का पर्व मानाया जाता है। हर त्योहार की तरह यह त्योहार भी कई राज्यों में मनाया जाता है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा उत्साह बनारस में देखने को मिलता है. इस दिन मां गंगा की पूजा की जाती है। गंगा के तटों का नजारा

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